The 2-Minute Rule for hindi kahani moral
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और फिर साधू के कहने पर किसान और उसकी पत्नी ने मिलकर भोजन तैयार किये जिसके बाद वे राहगीर चलते हुए लोगो को बुलाने लगे और भगवान के प्रसाद के रूप में भोजन करने का आग्रह करने लगे फिर जो भी उधर से गुजरता गरीब किसान उन्हें भरपेट भोजन कराते जिससे राहगीर काफी खुश होते और फिर उन्हें इस नेक कार्य के लिए ढेर सारा आशीर्वाद और अपनी इच्छानुसार धन भी देते जिससे वे फिर से मिले इन पैसो से लोगो को भोजन कराये,
जब वह बाजार पहुंचा तो वहां के व्यापारी उसकी अच्छी गुणवत्ता वाले अनाज को देखकर बहुत खुश हुए। उन्होंने श्यामू को उसके अनाज की उचित कीमत दी और श्यामू को अच्छा मुनाफा हुआ। श्यामू ने उन पैसों से अपने परिवार के लिए नए कपड़े और आवश्यक सामान खरीदा। उसमें कुछ पैसे बचत के लिए भी रखे और गांव लौट आया।
मित्रों, ईश्वर ने हमें जो दिया है उसी में संतुष्ट रहना आवश्यक है। अक्सर देखा है कि हमें हमेशा भगवान से शिकायत रहती है कि हमें यह नहीं दिया, वह नहीं दिया। अगर हम थोड़ा रुककर यह सोचें कि उस दयालु परमात्मा ने हमें कितना कुछ दिया है। तो हम सिर्फ उसका धन्यवाद ही देंगे।
एक गरीब किसान की कहानी: भाग्य का सही मूल्य
अकस्मात वहां एक भील जाति का शिकारी आ गया और उसने शेर पर हमला करके उसे मार भगाया।
साधु को देखकर मंत्रियो के मन में भी कई सवाल उठ रहे थे, उन्होंने राजा से कहा कि जितना हमे पता है आपका तो कोई भाई नहीं है तो अपने उस साधु को इतना बड़ा इनाम क्यों दिया?
इलियास ने आह भरते हुए कहा, “गोपी, सच्ची संपत्ति सोने या धन दौलत में नहीं मापी जाती है, बल्कि आपके परिवार के प्यार और दूसरों के प्रति आपके द्वारा दिखाई गई दयालुता में मापी जाती है। आप एक समय ऐसे व्यक्ति थे जो कड़ी मेहनत और विनम्रता के मूल्य को समझते थे, लेकिन अब तुम अपना रास्ता खो चुके हो।”
एक बार की बात है एक गाँव में गरीब किसान अपनी पत्नी की साथ रहता था उसके पास एक गाय और थोड़ी सी खेती के लिए जमीन थी जहा वह दिन भर अपने खेतो में काम करता था तब कही जाकर उसे खाने के लिए अनाज हो पाते moral stories थे इस तरफ से किसान अपना किसी तरह जीवन गुजारा करते थे जिस कारण से किसान की पत्नी हमेसा अपने भाग्य और भगवान को कोसती रहती थी की ना जाने किस जनम का पाप इस जनम में भरना पड़ रहा है जो की गरीबी में जीवन जीना पड़ रहा है,
इस पर उसकी मां रमेश को अपने साथ लेकर गांव चली गई।
रामू की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं रहती थी और अचानक एक बार तेज बारिश होने के कारण रामू की फसलें पूरी तरह से नष्ट। और यह देख रामू अत्यंत दुखी हो जाता है क्योंकि रामू का पूरे परिवार को बचाने का एकमात्र स्रोत व फसलें हुआ करती थी, जिससे उसका दिल टूट गया और रामू निराश हो गया।
एक बार कि बात है, एक गांव में एक रामचरण नाम का किसान रहता था। वह एक मेहनती और परिश्रमी किसान था। वह गांव के अपने खेतों में दिन रात मेहनत करता और अपने परिवार को पालता और उनकी आवश्यकता को पूरा करता था।
रमेश बहुत ही प्यारा बालक था। वह कक्षा दूसरी में पढ़ता। रमेश विद्यालय में स्वतंत्रता दिवस का राष्ट्रीय त्यौहार मनाया जाने वाला था। रमेश बहुत उत्साहित था इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए। रमेश को उसकी कक्षा अध्यापिका ने स्वतंत्रता दिवस की परेड में भाग लेने के लिए बोला था। उसके हर्ष का कोई ठिकाना नहीं था, वह खुशी-खुशी इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए तैयारियां करने लगा।
अब महेश के पास पूरी तरह से धन और अन्न की कमी हो गई थी। अगले दिन सुबह जब वह सोकर उठा तो उसने बाहर जाकर देखा कि उसकी फसल खेत में लहरा रही है। वह बड़ा ही खुश हुआ और घर में भी धनधान्य की कमी पूरी हो गई।
जैसे-जैसे साल बीतते गए, गोपी के खेत सूखने लगे। उपेक्षा और अहंकार ने अपना असर डाला, और एक बार चमत्कारी फसलें शून्य हो गईं। समृद्धि का मुख्य स्रोत लुप्त हो जाने से गाँव को भी नुकसान होने लगा।
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